[दीवान]उस नीले कोटवाले की याद में

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Thu Nov 26 11:18:02 CST 2015


<http://4.bp.blogspot.com/-c_KLrcZTDPw/Vlc-oiwI1kI/AAAAAAAAR1s/rBGs7Mzcvfs/s1600/Screen%2BShot%2B2015-11-26%2Bat%2B10.39.07%2Bpm.png>
यह नीले कोटवाला किताब को छाती से लगाए क्यों खड़ा है ?
इश्क के लाजवाब क्षणों में ऐसे सवालों में उलझ जाना उसकी फितरत रही है. इसलिए
वह चुप रहा.
उसके बालों में उंगलियाों को उलझाने लगा. बेचैन होती सांसें जातिविहीन समाज
बनाने की अंबेडकर की बातों से गुजरने लगीं- देखना यही किताब हमें हमेशा के लिए
मिला देगी !

( इश्क में शहर होना- रवीश कुमार )
-------------- next part --------------
An HTML attachment was scrubbed...
URL: <http://mail.mail.sarai.net/pipermail/deewan_mail.sarai.net/attachments/20151126/39ace5b9/attachment.html>


More information about the Deewan mailing list