[दीवान]जिस सुधीर चौधरी ने किया महिला शिक्षक का सम्मान तार-तार, उसे मिला रामनाथ गोयनका सम्मान

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Tue Nov 24 03:52:03 CST 2015


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जी न्यूज के दागदार संपादक सुधीर चौधरी को 16 दिसंबर 2012 में हुए दिल्ली
गैंगरेप की पीडिता के दोस्त का इंटरव्यू के लिए साल 2013 का रामनाथ गोयनका
सम्मान कल दिया गया. ये सम्मान सुधीर चौधरी के उस पत्रकारिता को धो-पोंछकर
पवित्र छवि पेश करती है जिसके बारे में जानने के बाद किसी का भी माथा शर्म से
झुक जाएगा.

पहली तस्वीर में आप जिस महिला के कपड़े फाड़ दिए जाने से लेकर दरिंदगी के साथ
घसीटने,बाल नोचने के दृश्य दे रहे हैं, ये शिक्षक उमा खुराना है. इन पर साल
2007 में लाइव इंडिया चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन किया और लोगों को बताया कि ये
महिला शिक्षक जैसे पेशे में होकर छात्राओं से जिस्मफरोशी का धंधा करवाती है.
चैनल ने इस पर लगातार खबरें प्रसारित की.

नतीजा ये हुआ कि दिल्ली के तुर्कमान गेट पर बलवाईयों ने इस महिला को घेर
लिया..कपड़े फाड़ दिए और मार-मारकर बुरा हाल कर दिया. पुलिस की सुरक्षा न मिली
होती तो इस महिला की जान तक चली जाती. बाकी देश के लाखों लोगों की निगाह में
ये शिक्षक ऐसी गुनाहगार थी जिसका फैसला लोग अपने तरीके से करने लग गए थे. लेकिन

जल्द ही पता चला कि चैनल के रिपोर्टर प्रकाश सिंह ने कम समय में शोहरत हासिल
करने के लिए जिस स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था वो पुरी तरह फर्जी है. उस
वक्त चैनल के प्रमुख यही सुधीर चौधरी थे और उन्होंने अपने रिपोर्टर को
क्रिमिनल बताते हुए साफ-साफ कहा कि इसने हमें धोखे में रखा और इस खबर की हमें
पहले से जानकारी नहीं थी. चैनल एक महीने तक ब्लैकआउट रहा. प्रकाश सिंह थोड़े
वक्त के लिए जेल गए..फिर छूटकर दूसरे न्यूज चैनल और आगे चलकर राजनीतिक पीआर
में अपना करिअर बना लिया और इधर खुद सुधीर चौधरी तरक्की करते गए.

इस फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के देखने के बाद जनता ने शिक्षक उमा खुराना के साथ जो
कुछ भी किया, उसकी कोई भरपाई नहीं हुई..अब वो कहां हैं, क्या करती हैं, किस
हालत में है इसकी मीडिया ने कभी कोई खोजखबर नहीं ली लेकिन अब जबकि सुधीर चौधरी
को महिलाओं के सम्मान के लिए ये अवार्ड मिला है तो कोई जाकर उनसे अपने
चिरपरिचत अंदाज में पूछे कि आपको ये खुबर सुनकर कैसा लग रहा है तब आपको अंदाजा
मिल पाएगा कि महिलाओं का सम्मान कितना बड़ा प्रहसन बनकर रह गया है.

बाकी जी न्यूज के इस दागदार संपादक पर बोलने का मतलब देशद्रोही होना तो है ही.
‪#‎मीडियामंडी‬
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2.


एक तरफ कथित दलाली मामले में जेल जा चुके ज़ी न्यूज़ के दागदार संपादक सुधीर
चौधरी को भारतीय पत्रकारिता का सर्वश्रेष्ठ रामनाथ गोयनका सम्मान मिला है तो
दूसरी तरफ हर साल की तरह मेरे उन दोस्तों को जो मीडिया में रहते हुए
मेनस्ट्रीम मीडिया के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे हैं.

कायदे से तो ऐसे दागदार संपादक पर हमें बात करनी छोड़ देनी चाहिए. भई जिसे देश
की एक बड़ी जमात उसे राष्ट्रवादी मीडियाकर्मी मानकर सम्मान से डीएनए शो देखती
है तो दूसरी तरफ खुद मीडिया के भीतर के लोग उन्हें पुरस्कार से नवाजते
हैं.लेकिन

इन सबके बीच मेरे दिमाग में एक सवाल तो बार-बार उठता ही है- क्या पुरस्कार चयन
समिति में वो मीडियाकर्मी भी शामिल रहे हैं जिन्होंने 100 करोड़ की कथित दलाली
मामले में कभी सौ सुधीर चौधरी का विरोध किया था ?
बाकी ब्रांड के मेकओवर के लिए रामनाथ गोयनका अवार्ड तो असरदार विम लिक्विड है
ही..सारे दाग-धब्बे साफ़
‪#‎मीडियामंडी‬
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