[दीवान]मीनाक्षी-जे.सुशील की यायावरी पर एक रपट

Brajesh kumar Jha jha.brajeshkumar at gmail.com
Sat May 16 10:30:47 CDT 2015


यहां हर घर एक कला दीर्घा है





हद के पार मीनाझी और जे.सुशील संभावना तलाश रहे हैं। वे उन चीजों की खोज कर
रहे हैं, जो शायद अब रहेंगी नहीं। पेंटिंग की दुनिया में उनका प्रयोग अभिनव है।



वे रंग और कूची के साथ यायावरी के लिए निकलते हैं। लोगों से परिचय बढ़ाते हैं।
उनके घर ठहरते हैं। फिर उनकी दीवार पर पेंटिंग कर आगे बढ़ जाते हैं। पिछले
दिनों बिहार और झारखंड की यात्रा पर थे।



पूर्णिया के संथाल टोला से लौटकर जे. सुशील ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, ''कितना
कुछ सीखने को है, आदिवासियों से। काश, कि सब कुछ सीख पाते। सीख पाते उनकी मूक
भाषा, जिससे वे रिश्ता कायम कर लेते हैं हर उस आदमी से, जिनके अंदर संवेदना
होती है।'' पूर्णिया के गिरीन्द्र नाथ बताते हैं, ''मीनाक्षी और जे. सुशील ने
यहां एक लम्हा दीवार पर उकेर दिया है।''



दरअसल, इस बार बिहार और झारखंड की 45 दिनी यात्रा पूरी कर मीनाक्षी और जे.
सुशील दिल्ली लौटे हैं। हालांकि, यह उनकी पहली यात्रा नहीं है। साल भर पहले वे
सुदूर दक्षिण से हो आए हैं। इस बीच महाराष्ट्र भी गए। जम्मू-कश्मीर की भी
यात्रा की। इनकी यायावरी का ढंग अलग है और खासा दिलचस्प भी।



अपनी यात्रा के दौरान वे जाने-अनजाने ऐसी चीजों की तलाश कर रहे हैं, जो शायद
आगे रहेंगी नहीं। रिश्ते के उन धागों को पकड़ रहे हैं, जो काफी पहले तार-तार
हो चुके हैं। वह पूर्णिया का संथाल टोला हो या भागलपुर का यतीमखाना। मीनाक्षी
और सुशील ने पेंटिंग के बहाने यहां से एक अनाम रिश्ता जोड़ लिया है। अब संथाल
टोला के कल्याण टुडू का परिवार और यतीमखाने के वे 70 बच्चे इन्हें शायद ही भूल
पाएंगे। बेशक वे पेंटिंग के बहाने मिले, लेकिन रंगों में जो स्नेह घुला, वह
दीवार के साथ-साथ मन-मस्तिष्क पर भी गहरे अंकित हो गया है।



मीनाक्षी ने आर्ट की पढ़ाई की है। जे. सुशील पत्रकार हैं। रिश्ते में वे
पति-पत्नी हैं। दोनों एक से बढ़कर एक जुनूनी। बातचीत के दौरान सुशील ने कहा,
''हम तो इनके सारथी हैं।'' इस बात पर मीनाक्षी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी,
मानो सुना ही नहीं। हालांकि, उनके काम-काज का तरीका विनम्रता का परिचय दे रहा
था। दिल्ली के बसंत कुंज में घर के बाहर लगी हरी बुलेट और दीवार पर बनी
पेंटिंग दूर से ही कला प्रेमी के घर का आभास कराती है। इनके सधे हुए हाथ का
पता पहली बार यहीं हुआ।



घर के भीतर दाखिल होते ही मालूम होता है कि हम किसी कला दीर्घा में आ गए हैं।
यह भी महसूस हुआ कि महानगरीय जीवन की आपा-धापी के बीच इन्होंने अपने फ्लैट को
घर बना रखा है, जहां आंगन की कमी नहीं खटकती।



सुशील दंपत्ति संबंध की तासीर को बखूबी समझते हैं। डासना जेल रंग और कूची के
साथ पहुंचे तो वहां माहौल उत्सव सरीखा हो गया। जेल में पेंटिंग कर जब लौटने
लगे तो अजय ने कहा, ''हमें थोड़ा गाइड कर दीजिए, हम भी पेंटिंग करना चाहते
हैं।'' हालांकि, जवाब मुश्किल नहीं था, पर सुशील अपने ब्लॉग पर लिखते हैं,
''हम इतना ही कह पाए कि तुम्हारे जैसा अनुभव दुनिया में किसी का नहीं होगा। उस
अनुभव को अगर कैनवास पर उतार पाए तो तुम्हें बड़ा कलाकार होने से कोई रोक नहीं
सकेगा।''



डासना जेल में अजय डकैती के आरोप में पांच साल की सजा काट रहा था। और कुछ ही
समय बाद उसकी रिहाई होने वाली थी।



खैर, पंचकूला यात्रा के बाद सुशील दंपत्ति ने जो कहा है, वह दिलचस्प है। वे
कहते हैं, ''पंचकूला में जो हमने बनाया, वो कहने को तो पूरा है, लेकिन हमारे
हिसाब से अधूरा है। क्योंकि हम जानते हैं कि इसमें वीरेंद्र अंकल और रेणु आंटी
अपनी क्रिएटिविटी से जान डालने वाले हैं।'' उन्होंने आगे कहा, ''यही हमारा काम
था। लोगों के भीतर के कलाकार को थोड़ा प्रोत्साहन देना और बदले में हमने पाया
ढेर सारा प्यार, अपनापन।''



पुणे से चेन्नई तक का सफर हो या होसूर में एक स्कूल की पेंटिंग का अनुभव। हर
जगह वे आम आदमी के भीतर छिपे कलाकार को बाहर लाने और उकसाने में सफल हुए। इस
दौरान जो रिश्ता बना, वह तो बना ही। यही वजह थी कि उन्हें भविष्य के लिए भी
ऑर्डर मिल रहे थे। पुणे में मोहनन दंपत्ति के घऱ पेंटिंग के दौरान वंदना ने
उनसे कहा, ''अबी तो मेरे को घर नय है। जबी मेरा घर होगा तो मैं बुलाएगी तेरे
को। खाना भी खिलाएगी। घुमाएगी भी। मेरे घर में भी पेंटिंग

करने का।'' सुशील लिखते हैं, ''वंदना काम वाली बाई है, लेकिन दीवार पर बनती
हुई बुद्ध की पेंटिंग को देखकर उसने हमसे यही बात कही।''



बहरहाल, कला दीर्घा की सीमा के पार जाकर पेंटिंग को विस्तार देने का यह तरीका
अब से पहले कहीं देखा-सुना नहीं गया। मीनाक्षी कहती हैं कि यह कम्यूनिटी
आधारित कला है। हम जहां जाते हैं, वहां की कला को दूसरे जगह ले जाते हैं।
उन्होंने अपने अनुभव से पाया कि यहां हर घर एक कला दीर्घा है और हर शख्स एक
कलाकार।
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