[दीवान]क्या बात पीछे संस्कृति रच्छक प्रधानसेवक का उल्लू-दुत्थु करना जायज है ?

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Jun 22 01:18:02 CDT 2015


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कुछ दिनों बाद अपने पुराने मोहल्ले फेसबुक पर आया तो देख रहा हूं कि मेरे कुछ
अजीज दोस्त विश्व योग दिवस के पावन मौके पर अपने प्रधानसेवक का हुले-लु-लु
करने में जुटे हैं. वजह बस इतनी है कि जिस राष्ट्रध्वज की उंचाई अपनी आंखों
में सीलबंद करने के चककर में कनॉट प्लेस, सेन्ट्रल पारक( नॉट पार्क) के आगे
कईयों की पालिका बाजारवाली कैप लुढ़क जाती है, प्रधानसेवक ने उसी तिरंगे को
नटपोछवा गमछा( घर में बाबा-दादा का गमछा पुराना पड़ जाए तो मांएं उससे बच्चे
का नाक साफ करने के काम लाती है और पुरानी धोती को बिष्टी बना दिया
करतीं..बिष्टी माने जिसमे बिष्ठा का त्याग किया जा सके..ये हग्गीज और मैनीपोको
पैन्ट्स से अलग दुनिया की बात है) बना दिया..इससे हुआ ये कि उनकी भक्ति भावना
आहत हुई...कुछ की आहत नहीं हुई है बल्कि प्रधानसेवक के सहयोगियों के ही पूर्व
तर्कों और कारनामे की याद दिला रहे हैं. लेकिन


प्रधानसेवक का उल्लू-दुत्थु करते हुए इन्होने ये नहीं देखे कि हमारे
प्रधानसेवक जिस भारतीय संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं वो बात अननोटिस्ड रह गई.
प्रधानसेवक का उत्साहवर्धन हेतु उनकी ही पार्टी के संबित पात्र विश्व योग दिवस
की पूर्वसंध्या पर #‎worldyogaday
<https://www.facebook.com/hashtag/worldyogaday?source=feed_text&story_id=10206650497158791>
की
लोगो(छापा) वाली राउंडनेक( गोल गला का गंजी) पहने चैनलों पर अवतरित होते रहे,
यहां तक कि प्रधानसेवक के आजू-बाजू हजारों योगप्रेमियों ने राउंड नेक की टी
पहनी लेकिन हमारे प्रधानसेवक ने भारतीय संस्कृति की रच्छा करते हुए
कुर्ता-पाजामा पहना..मेरे अजीज दोस्तों के पास इस बात का जवाब है कि कुर्ते के
साथ वो गमछा न पहनते तो क्या फैब इंडिया की स्टोल धारण करते. रही बात तिरंगे
की तो यदि सिर्फ हरे और भगवा रंग का धारण करते तो आप ही कहते इन्होंने विश्व
योग दिवस के नाम पर विश्व कमलफूल दिवस मनाया और यदि सफेद रखते तो आपको लगता ये
विलेटेड वड्डे बऑय राहुल की नकल कर रहे हैं.. आपको साठ साल पुरानी बल्कि
लेटेस्ट राष्ट्रीयता की ज्यादा चिंता है औ प्रधानसेवक जो उससे कई साल पुरानी
संस्कृति बचा रहे हैं तो कुछ नहीं..जित्ते पैसे में टीशर्ट पर छापा पड़ा है,
उत्ते पैसे में पाजामा आ गया होगा,उस सादगी को नोटिस नहीं कर रहे हैं...हद है.
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