[दीवान]ऑल इंदिरा रेडियो का वो दौर

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Sat Jun 20 08:13:41 CDT 2015


आज इंदिरा गांधी द्वारा लगायी गई इमरजेंसी के चालीस साल हो गए. ये अलग बात है
कि चालीस साल पहले जो इमरजेंसी सत्ता और सरकार की ओर से ताल ठोककर लगायी गई
थी, अब बिना ताल ठोके ही जनतंत्र अपने आप ही ट्यून्ड हो जा रहा है. इस मामले
में सरकार को पहले के मुकाबले कम मेहनत करनी पड़ रही है. खैर,
 टेलीविजन,अखबार से लेकर सोशल मीडिया पर अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के बीच ये
दौर मीडिया में दिलचस्पी रखनेवालों के लिए अलग से अध्ययन की मांग करता है.
इंडिया टुडे की स्टोरी जानकारीपरक और दिलचस्प है. पूरी पैकेजिंग में चैनल ने
एपिक चैनल की स्ट्रैटजी और बुनावट को काम में लिया है. पैकेज में काफी कुछ ऐसा
है जिन्हें हम किताबों, आलेखों के जरिए पहले से जानते हैं लेकिन वीडियो की
शक्ल में देखने का अपना अनुभव है.
इसी क्रम में खुशवंत सिंह की बीच-बीच में बाइट आती है. इंदिरा चुनाव बुरी तरह
हार जाती हैं और खुशवंत सिंह उनसे सवाल करते हैं- ऐसा कैसे हो गया ? इंदिरा का
उस वक्त जवाब था- हमारे पास फीडबैक नहीं थी. खुशवंत सिंह इस घटना को याद करते
हुए दोहराते हैं- फीडबैक कहां से होती, आपने तो प्रेस पर ही पाबंद लगा दी थी.
इसी कड़ी में इंडिया टुडे चैनल ने एक और स्टोरी की है इंदिरा गांधी और कांग्रेस
के दबाव में कैसे बॉलीवुड ने इमरजेंसी को नज़रअंदाज़ किया..किस्सा कुर्सी का
जैसी फ़िल्म बनी भी तो उस वक़्त रिलीज़ नहीं होने दी गयी..वैसे आप पैकेज गौर से
देखेंगे तो देवानंद से लेकर दिलीप कुमार तक के दिग्गज इंदिरा गांधी के साथ उसी
तरह नज़र आ जायेंगें जैसे अभी जन धन योजना और कभी गुजरात आईए के साथ बिग बी नज़र
आते हैं.

इधर कोमी कपूर की इंदिरा गांधी और इमरजेंसी को लेकर किताब आयी है- The
Emergency: A Personal History.  कोमी कपूर तब यानी १९७५ में द इंडियान
एक्सप्रेस के दिल्ली संवाददाता हुआ करते थे. caravan पत्रिका ने किताब का वो
हिस्सा प्रकाशित किया है जिसका संबंध इंडियन एक्सप्रेस और रामनाथ गोयनका के उस
फैसले से है जिसकी छवि अभी-अभी अखबार और इस मीडिया संस्थान की मार्केटिंग टीम
का काम आसान करती आयी है.
नेहरु ने बिल्बर श्रैम की मदद से जिस विकासवादी मीडिया की परिकल्पना की थी,
इंदिरा के दौर में उसका क्या हुआ, इस पर विस्तार से बहुत कुछ लिखा जाना बाकी
है..संभव हो एक्सप्रेस की गौरवशाली परंपरा का भी प्रतिपक्ष निकलकर आए और ऑल
इंडिया रेडियो के ऑल इंदिरा रेडियो की बनने की कहानी तो है ही...

इंडिया टुडे की स्टोरी लिंक-https://www.youtube.com/watch?v=WMb6bis74dM
caravan में कोमी कपूर की किताब का अंश-
http://www.caravanmagazine.in/Vantage/ramnath-goenka-refused-compromise-indian-express-during-emergency
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