[दीवान]ये केजरीवाल के लिये उतना ही हग डे भी है(लप्रेक)

Ravikant ravikant at sarai.net
Wed Feb 11 06:39:37 CST 2015


और सोचो विनीत इस बार वैलेंटाइन का भी क्या शुभ मुहुरत निकला है - केजरीवाल व
मंत्री सरकार की शपथ लेंगे, और लोग इश्क की कसमें खाएँगे; क्या नजारा होगा, वह
भी रामलीला मैदान में खुलेआम, सरेआम, दिन-दहाडे!

दिल्ली में और दिल्ली से तो हमने इश्क बहुत किया है, लेकिन इस बार इश्क में
दिल्ली होना! वाकई थोडा अलग होगा.

और उम्मीद है कि रवीश की शानदार लप्रेकीय रचनात्मकता को तुम और गिरीन्द्र और
थोडी और ऊँचाई, गहराई और विविधता दोगे.

शुक्रिया,
रविकान्त

2015-02-10 21:53 GMT+05:30 vineet kumar <vineetdu at gmail.com>:

> प्राक्कथन! तुम्हें हमेशा लगता है न राजनीति और इश्क साथ-साथ नहीं चल
> सकता..लेकिन देख रहे हो न ये तस्वीर..दुनिया के लिये ये जीत की जश्न का नज़ारा
> है लेकिन सोचो तो इससे खूबसूरत हग डे कोई और कैसे मना सकता है ?.
> तुम मौके को हमेशा थोपती क्यों हो भूमिका..क्या इतने लोगों के बीच केजरीवाल
> के अपनी पत्नी को हग करने से हग डे मनाना हो गया, ये तो दिमाग की ज़बरदस्ती हो
> गयी.
> प्राक्, ज़रूरी तो नहीं कि इश्क हमेशा एकांत डिमांड करे, हमें इश्क को इवेंट
> के बदले नार्मल एक्टिविटी की तरह लेना होगा, शहर के बीच,लोगों के बीच..हम इश्क
> करते हुये इन सबके बीच से आखिर भागना क्यों चाहते हैं प्राक्? इससे खूबसूरत
> क्या हो सकता है प्राक् कि इश्क,राजनीति और शहर एक सर्किल में आकर घूम जाये..
> क्योंकि मैं तुम्हारी तरह इश्क और पोस्टर को मिक्स नहीं कर सकता.
> ओके..और मैं तुम्हारी तरह इश्क और मौके को पंचांग के हवाले नहीं कर
> सकती.#लप्रेक-ऑफ्टर इश्क में शहर होना-4
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