[दीवान]हिंदीसमय में इस हफ्ते

Hindi Samay hindeesamay at gmail.com
Fri Mar 28 06:26:42 CDT 2014


मित्रवर

प्रेमचंद <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1152>
हिंदी के ऐसे विचारक रचनाकार हैं जिन्होंने न सिर्फ हिंदी कहानी या उपन्यास को
एक पूरी तरह से बदल दिया बल्कि तत्कालीन राजनीतिक सांस्कृतिकसमस्याओं पर भी
खुलकर अपनी राय रखी। प्रखर आलोचक
राजकुमार<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2414>
 यहाँ प्रेमचंद के वैचारिक साहित्य पर प्रेमचंद और
राष्ट्रवाद<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3964&pageno=1>
 शीर्षक से विचार करते हुए कहते हैं‘कि प्रेमचंद ने पूर्व और पश्चिम के अंतर को
 मिटाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पश्चिम का न तो आँख मूँद कर समर्थन किया और
 न ही विरोध। गांधी की तरह उन्होंनेपश्चिम की लगभग हर बात का निषेध भले ही न
किया गया हो, लेकिन चूँकि उनकी जड़ें भारतीय गाँवों में थीं और उन पर गांधी जी
का गहरा असर था, इसलिए उन्होंनेपश्चिम की हर बात को सही भी नहीं माना। सबसे
पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि उन्होंने पश्चिम को किस रूप में देखा। पश्चिम को
 देखने के उनके ढंग से यह भीअनुमान लगता चला जाएगा कि पूर्व के बारे में उनका
नजरिया क्या है।’

इस बार हिंदीसमय (http://www.hindisamay.com) पर प्रस्तुत हैं अलग अलग पीढ़ियों
के पाँच कथाकारों की पाँच कहानियाँ - अमरकांत
<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=35>
 की लड़का-लड़की <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3979&pageno=1>
, उदय प्रकाश <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=68>
  की ‘जज साहब’ <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3982&pageno=1>
, जयशंकर <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=156> की
अँधेरे  <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3967&pageno=1>,
नीलाक्षी सिंह<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=201>
 की जिनकी मुट्ठियों में सुराख
था<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3968&pageno=1>
 और अरविंद <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1859>
की रेडियो <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3983&pageno=1>।
ये पाँचों कहानियाँ एक दूसरे से अलग हैं और हिंदी कहानी की विविधता की एक
सुंदर बानगी उपस्थित करती हैं। साथ में बाल साहित्य के अंतर्गत प्रस्तुत है
युवा रचनाकार डॉ.ज़ाकिर अली
‘रजनीश’<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1686>
 का विज्ञान गल्प
विस्फोट<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3984&pageno=1>
।

गाँधी जी के विचारों की जरूरत को रेखांकित करते हुए भारत
यायावर<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=558>
 के दो लेख गांधी होने का अर्थ
<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3986&pageno=1>
 और वह अधनंगा फकीर!<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3987&pageno=1>
 यहाँ प्रस्तुत हैं। यह अनायास नहीं है कियहाँ प्रस्तुत राजेंद्र
त्यागी<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2136>
  का व्यंग्य असत्य ही सत्य
है<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3988&pageno=1>
 भी अपनी शुरुआत गांधी जी से ही करता है। नारीवाद इस समय की केंद्रीय
विचारधाराओं में से एक है। यहाँ पेशहैं
शिवप्रिय<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2415>
 के दो परिचयात्मक शोध आलेख भारतीय समाज में नारीवाद
<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3989&pageno=1>
 और पश्चिमी दुनिया में
नारीवाद<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3981&pageno=1>
 कविताएँ हैं युवा कवि आलोक
पराड़कर<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2398>
 की।



सादर,

हिंदी समय टीम
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