[दीवान]हिंदीसमय में इस हफ्ते

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Mon Mar 24 00:39:04 CDT 2014


मित्रवर

भवानीप्रसाद मिश्र<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1374>
 हिंदी के अप्रतिम कवि हैं। उनकी कविताओं के बारे में *नंदकिशोर आचार्य
<http://www.hindisamay.com/writer/%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF.cspx?id=1361&name=%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF>*
 कहते हैं ‘भवानीप्रसाद मिश्र की कविता हिंदी की सहज लय कीकविता है। खड़ी बोली
में बोलचाल के गद्यात्मक से लगते वाक्य-विन्यास को ही कविता में बदल देने की जो
 अद्भुत शक्ति है, उसकी अचूक पहचान भवानी भाई कीकविता में दिखाई देती है। ...
बोलचाल की इस लयात्मक संरचना के ही कारण उनकी कविता का स्वभाव मूलतः बातचीत या
कहें कि वर्णन करने का है और इसी कारणउसमें एक प्रभावी किंतु सहज नाटकीयता आ
जाती है और ये सब गुण मिलकर उनकी कविता में वह सामर्थ्य विकसित कर देते हैं कि
वह सरलतम तरीके से जटिलतरस्थितियों और अनुभवों को संप्रेषित करने में कामयाब
होती है। कविता में इस किस्म की सरलता को पारदर्शिता कहा जाना चाहिए, लेकिन इसे
 सिद्ध कवि ही हासिलकर पाते हैं। भवानी भाई इसमें अप्रतिम हैं।’ इस बार
हिंदीसमय (http://www.hindisamay.com) पर प्रस्तुत हैं उनकी पचास कविताएँ।

           हमने बताया था कि हम गांधी जी के जीवन और कृतित्व पर नियमित रूप से
आपके सामने नई-नई सामग्री लेकर आते रहेंगे। इस सिलसिले में आजप्रस्तुत है असगर
वजाहत  <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=41> का
नाटक गोडसे@गांधी.कॉम<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=756&pageno=1>
 । रमेश बक्षी <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2162>
 की कहानियाँ यहाँ आप पहले भी पढ़ चुके हैं। इस बार पेश हैं उनकी तीन और
कहानियाँ अलग-अलग कोण
<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3959&pageno=1>
, हरी मछली के खेल
<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3958&pageno=1>
 और एक समानांतर
कहानी<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3960&pageno=1>
। साथ में पढ़ें शरद जोशी
<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1478>
 का व्यंग्य अतिथि! तुम कब
जाओगे<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3961&pageno=1>
। बाल साहित्य के अंतर्गत पेश है
राजेशउत्साही<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1654>
 की कविता आलू मिर्ची चाय
जी<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3962&pageno=1>
। भीमराव आंबेडकर
<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1741>
 उन विचारकों में से एक हैं जिनका भारतीय राजनीति और संस्कृति पर गहरा असर
दिखता है। प्रस्तुत है उनका विचारोत्तेजक निबंध बुद्ध अथवा कार्ल
मार्क्स<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3945&pageno=1>।
इसी तरह रामचंद्र शुक्ल
<http://www.hindisamay.com/writer/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2.cspx?id=1262&name=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2>
हिंदी
के ऐसे आलोचक हैं जो आज भी तमाम बहसों और विमर्शों के केंद्र में बने हुए हैं।
यहाँ प्रस्तुत है शुक्ल जी के गहरे अध्येता ओमप्रकाश
सिंह<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=105> का
व्याख्यान आचार्य रामचंद्र शुक्ल का
चिंतन<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3963&pageno=1>
।

                 अगले हफ्ते हम फिर से आपके सामने होंगे। हमें उम्मीद है
हमारा यह प्रयास आपको पसंद आएगा।



सादर,

हिंदी समय टीम
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