[दीवान]नरेन्द्र मोदी चे ग्वेएरा कैसे हो सकते हैं विकल्प ? ( पुलिटिकल लप्रेक)

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Thu Mar 27 23:21:43 CDT 2014


विकल्प, तुम पागल तो नहीं हो गए हो, इस टी को पहनकर जाओगे चायना वॉल डिनर करने
?

क्यों, इस टीशर्ट में क्या प्रॉब्लम है, ब्लू जींस पे ये डार्क यलो, ठीक तो है.

ठीक है लेकिन पीछे जो इतने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है- मोदी फॉर
पीएम..इट्स सो फनी. उतारो ये टी, नहीं तो मैं नहीं जा रही तुम्हारे साथ. उठा
लाए मुफ्त की टीशर्ट और डाल लिया, कुछ तो ख्याल करो विकल्प कि तुम बीजेपी के
सिम्पथाइजर के अलावे एक इन्डीविजुअल भी हो, विकल्प हो. क्यों किसी ऐसे शख्स के
लिए अपनी पीट को होर्डिंग्स बना रहे हो जो अपने आगे किसी को समझता नहीं,
तानाशाह है. इट्स रियली डिसगस्टिंग.

<http://2.bp.blogspot.com/-gBpZw7cysWo/UzT4bCP7_oI/AAAAAAAAFxM/Pt6jS-Kdx6I/s1600/namo.PNG>
तन्हाई, पहले तुम एक बीत क्लियर करो, तुम्हें इस टीशर्ट से प्रॉब्लम है या फिर
नरेन्द्र भाई से ? टीशर्ट से प्रॉब्लम है तो मैं तो उतारने नहीं जा रहा और
नरेन्द्र भाई से तो डिनर यहीं ऑर्डर करते हैं और बैठकर इस पर बात करते हैं ?

हुंह, बैठकर बात करते हैं, ऐसा क्या है इस शख्स को लेकर बात की जाए, पिछले जस
सालों से जो कारनामेऔर अब नौटंकी करता आया है, उसके बाद भी इस पर बात करने के
लिए कुछ बचा है ? मैं कुछ सुनना नहीं चाहती, तुम्हें चायना बॉल चलना होगा,
उसके पहले ये टी बदलनी होगी और ये नरेन्द्र भाई-नरेन्द्र भाई की जो कंठी माला
पहन रक्खी है न, कम से कम डिनर तक उतार फेंकनी होगी. अब चल, जल्दी कर
फटाफट..नहीं तो अभी तेरी पिछाड़ी गर्म करती हूं..आय एम सीरियस नाउ.

सुन लो तन्हाई, अभी तक मैं तुम्हारी बात को हल्के में ले रहा था लेकिन हर चीज
की कोई सीमा होती है. अब मुझे लग रहा है कि हमें इस मुद्दे पर सीरियसली सोचना
होगा. मेरी हर बात के पीछे तुम्हें दिक्कत होती है. मेरी सोच से, मेरी पसंद
से, मेरे कपड़े से सबकुछ से तुम्हें प्रॉब्लम है. तुम्हें तब पता नहीं था जब
मैं हर डिबेट में तुम्हारे ही साथ वाजपेयीजी की कविताएं कोट करता था,
गोलवलकरजी, रज्जू भैय्या के उद्धरम शामिल करता था, मेरे साथ के सारे लोग
एबीवीपी से थे..तब तो तुझे कोई प्रॉब्लम नहीं थी और अब हर बात पर ये स्साले
संघी, ये दक्षिणपंथी, फक्क यार..क्या है ये सब ?

तुम हर डिबेट में मार्क्स, एंगिल से लेकर मुक्तिबोध, धूमिल को कोट करती
थी..मुझे ये लोग पसंद नहीं है..ये परिवार, समाज और संस्कार खत्म करने का काम
करते आए हैं. मैंने तो कुछ नहीं कहा तुझे. तू अशोका रोड में हॉट पैंट के उपर
उस दढ़ियल चे ग्वेअरा की टीशर्ट पहनकर खुलेआम घूमती थी, फैशन से ज्यादा मुझे
जलाने के लिए, मैंने तो कभी नहीं मना किया. तुम बात-बात में ऐसा क्यों मेरे
साथ कर रही हो ?

यस, यस..मेको पहले से पता था कि तू एक दिन मुझे उस टीशर्ट की याद जरुर दिलाएगा
जिस पर छपी तस्वीर देखकर तू खुद ट्रिमिंग किया करता था. मैं तेरे से मजाक में
कहती भी- स्साले जब जीता गोलवलकर को है तो दाढ़ी चे ग्वेएरा जैसी क्यों रखना
चाहता है ? तब तो पलटकर जवाब देता- इस दाढ़ी, लुक, कुर्ते और टीशर्ट को
आयडलॉजी में मिक्स मत करो, ये दोनों अलग चीजें हैं. तू ही तो कहता था कि मेरी
उस चे-ग्वेएरी वाली टीशर्ट से प्रॉब्लम नहीं होती क्योंकि मुझे पता है जब तू
इसे हॉट पैंट के साथ पहनती हो तो वो विचारों की प्रतिबद्धता न होकर फैश्टिच
फैशन हो जाता है..अब क्या हो गया ?

अब क्या हो गया ? यही तो मैं पूछ रहा हूं कि अब क्या हो गया ? क्यों डेनिम
जींस के साथ ये टीशर्ट पहनी है, तू भी तो कन्सिडर कर सकती है कि ये फैशन
है..तुझे क्या प्रॉब्लम है ?

कर सकती हूं, बिल्कुल कर सकती हूं..लेकिन ये एलेक्शन के पहले ही "मोदी फॉप
पीएम". तेको नहीं लगता कि ये खुद डेमोक्रेसी के खिलाफ है कि, वोटर का अपमान है
कि एलेक्शन के पहले ही सब पहले से डिसाइड कर लिया. न जनता की फीलिंग्स समझनी
है, न पार्टी की. सॉरी, तेरे ये नरेन्द्र भाई जितने सेलफिश इंसान की टी पहनकर
घूमना कहीं से भी जस्टिफायड नहीं है..और सुन, चे-ग्वेएरा की टी मेरे लिए
आयडलॉजिकल कमिटमेंट न सही, फैशन ही है तो उस फैशन की भी तो एक सेंस है न यार-
मार्क्स की कहे दो शब्द- डाउव्ट एवरीथिंग..क्या गलत है इसमे ? इस अकेले दो
शब्द की कितनी अहमियत है लाइफ है, समझता है..और ये किसी कॉमरेड के लिए ही
नहीं, संघी के लिए भी..सभी के लिए. बोल क्यों न बने ये फैशन. तू फैशन उसको
बनाएगा जो शक्स स्वार्थ के पीछे इतना पागल हो चुका है कि जिन लीडर्स ने उसे
यहां तक लाया, वो आज उसके लिए डस्टबिन मटीरियल हो गया..तू ऐसे भी सोच न ? और
हां, मैं शुरु से जानती थी कि तू दक्षिणपंथी है, आगे इसी की पॉलिटक्स करेगा,
तब भी तेरे साथ थी..हर वक्त क्योंकि हमने आपस में जो किया वो दक्षिणपंथ-वामपंथ
से बहुत अलग और आगे की चीज थी, बोल मानता है न इसे ? मुधे तेरे दक्षिणपंथी
होने में दिक्कत नहीं है, दिक्कत उसकी लुम्पेन बन जाने में है और ये टी पहनकर
तू यही प्रूव कर रहा है. तू दिन-रात हेडगेवार पढ़, डूबा रहा गोलवलकर संचयन
में, देवरस की जीवनी चाटता रह, कोई दिक्कत नहीं है..लेकिन ये दक्षिणपंथ के नाम
पर एक शख्स की बैनरबाजी छोड़ दे, अपनी पीठ को उस शख्स के लिए एमसीडी की दीवार
मत बनने दे विकल्प प्लीज..
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