[दीवान] Fwd: for deewan

Ravikant ravikant at sarai.net
Fri Mar 14 04:40:27 CDT 2014


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हम सबके भीतर बैठे लेखक के नाम

बांटने के लिए अनुभव और सुनाने के लिए क़िस्से किसके पास नहीं होते! जितने तरह
के लोग, जितने क़िस्म के हालात, उतने ही अफ़साने और उतनी ही दास्तानें। पर
इन्हें पन्नों पर हर कोई नहीं उतार पाता, क्योंकि पन्ने पर शब्दों को बरतने का
सलीक़ा सभी अर्जित नहीं कर पाते। क्या यह कोई नैसर्गिक गुण है, जैसा कि आज तक
दावा किया जाता रहा है? अंकुर का तजुर्बा इसकी ताईद नहीं करता। अंकुर संस्था
दिल्ली के कुछ मज़दूर इलाक़ों में अपने शैक्षणिक केंद्र चलाती है। हमें जब लगा
कि हमारे समाज के कई बेहद समृद्ध अनुभव लिखित शब्दों की दुनिया में दाखि़ल ही
नहीं हुए हैं तो इसे मुमकिन करने की एक कोशिश शुरू हुई। लगा कि यह अपने तरह का
एक मूलभूत सशक्तिकरण होगा। जो लेखन का विषय बनते रहे हैं, वे खुद लिखें, अपने
बारे में, अपने परिवेश के बारे में, अपनी कल्पनाओं और अचरज, खुशी, अवसाद,
जिज्ञासा से भरे अपने अनुभवों के बारे में। इस समझ के साथ हमने अपने मुख़्तलिफ़
केंद्रों के बाल-किशोर-भागीदारों को लिखने के लिए उकसाया। विधाओं की बाड़ेबंदी
तय किए बिना। लिखने का कोई सिलेबस पकड़ाए बिना। और यह काम उन्हें मौक़ा दे देने,
यानी काग़ज़-क़लम-दावात पकड़ा देने भर से नहीं हो सकता था। इसके लिए कई तरह से
उन्हें तैयार करने की ज़रूरत थी। लिखने को लेकर आम तौर पर जो एक ख़ौफ़ हमारे
भीतर होता है, उसे धीरे-धीरे खुरच कर हटाना था। लिखे को सुनने, सराहने,
गरियाने और सुझाव देने वाला एक समूह तैयार करना था। हमने अपनी क्षमता भर यह सब
किया। एक-एक कर इसके नतीजे आने शुरू हुए, जिनको पहले बहुरूपिया शहर (राजकमल
प्रकाशन, 2007) में जगह मिली, फिर यशोदा सिंह की किताब दस्तक (वाणी प्रकाशन,
2012) सामने आई, और अब उनके बाद के रचनात्मक प्रयासों की यह नई खेप आपके सामने
है।
हम प्रियंवद के शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने हमारे निमंत्रण पर इन लेखकों के
साथ बैठकबाज़ी की और उन्हें सुनने, सुझाव देने के साथ-साथ लिखने के अपने
अनुभवों को उनके साथ साझा किया। ‘अकार’ के इस अंक ने उनके मन में उसी समय आकार
लिया। इस आयोजन के लिए भी उन्हें धन्यवाद!

अंकुर के अपने सहकर्मी, शशि चौहान, चंद्रकांता और शशि गुप्ता का भी धन्यवाद,
जो इन लेखकों के साथ नियमित संवाद में रहते हैं और उन्हें ईंधन देते रहते हैं।



प्रभात
अंकुर सोसायटी फॉर ऑल्टर्नेटिव्ज़ इन एजुकेशन, नई दिल्ली
ईमेलः ankur.societyforeducation at gmail.com
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