[दीवान]हिंदीसमय में इस हफ्ते

HINDI SAMAY hindisamaymgahv at gmail.com
Mon Mar 10 06:18:54 CDT 2014


मित्रवर

पूरब और पश्चिम दोनों की अलग संस्कृतियाँ रही हैं। उनके बीच टकराव और लेन-देन
दोनों साथ साथ चलते रहे हैं। चर्चित लेखिका संतोष
श्रीवास्तव<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=399>का
उपन्यास *टेम्स की
सरगम*<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3801&pageno=1>
  इसी टकराव और सामंजस्य का सुंदर रचनात्मक रूपांतरण पेश करता हैं। जाहिर है
कि इस रूपांतरण का एक स्त्री पक्ष भी है जो समूचे उपन्यास में एक धीमी पर सतत
बहनेवाली धारा की तरह बहता रहता है। एक रोचक और पठनीय उपन्यास।



कहानियों के अंतर्गत इस बार हिंदीसमय (http://www.hindisamay.com) पर प्रस्तुत
हैं अलग-अलग पीढ़ियों की पाँच लेखिकाओं की कहानियाँ। यहाँ आपके सामने है *महादेवी
वर्मा* <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1319> की
कहानी बिंदा <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=310&pageno=1>,
*ममता
कालिया* <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=288> की
कहानी कामयाब <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3839&pageno=1>,
*अल्पना मिश्र* <http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=46>की
कहानी सुनयना! तेरे नैन बड़े
बेचैन!<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3838&pageno=1>,
*हुस्न तबस्सुम निहाँ*<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=1742>
की
कहानी ये बेवफाइयाँ
<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=1693&pageno=1>और
*सविता पाठक*<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2005>की
कहानी हिस्टीरिया<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3837&pageno=1>।
पाँचों कहानियाँ स्त्री जीवन की विडंबनाओं को बड़े सलीके से हमारे सामने रखती
हैं। इसी के साथ प्रस्तुत है सुपरिचित कथाकार *कविता*
<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=92>का
आत्मकथ्य
‘मैंने मैं शैली
अपनाई...’<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3849&pageno=1>,
जो स्त्री रचनात्मकता की दुनिया में प्रवेश करने के एक रास्ते सरीखा है।



जैनेंद्र की उपस्थिति हिंदी कथा साहित्य में विशिष्ट है। यहाँ उनके कथा
साहित्य पर जैनेंद्र की रचनात्मक दुनिया में
स्त्री<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3850&pageno=1>
शीर्षक
से विचार कर रही हैं युवा कवि-आलोचक *प्रीति
चौधरी*<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2405>।
समर्थ रचनाकार *मधु
कांकरिया*<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=263>
कई
विधाओं में लिखती रही हैं। यहाँ प्रस्तुत है उनकी डायरी बंजारा मन और
बंदिशें<http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3836&pageno=1>।
बाल साहित्य के अंतर्गत पेश हैं *पूनम श्रीवास्तव*
<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2358>की तीन
कहानियाँ <http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=3813&pageno=1>।
कविताएँ हैं *नेहा
नरूका*<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2406>
और
*मस्सेर येनलिए*<http://www.hindisamay.com/writer/writer_details_n.aspx?id=2404>
की।



अगले हफ्ते हम फिर से आपके सामने होंगे। हमें उम्मीद है हमारा यह प्रयास आपको
पसंद आएगा।



सादर,

हिंदी समय टीम
-------------- next part --------------
An HTML attachment was scrubbed...
URL: <http://mail.sarai.net/pipermail/deewan_mail.sarai.net/attachments/20140310/81e8bd0c/attachment-0003.html>


More information about the Deewan mailing list