[दीवान]आसाराम के बैकुंठ( इंडिया न्यूज साभार) जाने पर

Rakeshराकेश rakeshjee at gmail.com
Wed Sep 4 11:38:21 CDT 2013


अच्‍छा चल रहा है विनीत. नियमित देखता रहता हूं.

On 9/1/13, vineet kumar <vineetdu at gmail.com> wrote:
> चंद फेसबुक अपडेट्स-
>
> 1. उम्मीद ही नहीं, पूरा यकीन है कि देश की एक बड़ी आबादी का मुख्याधारा
> मीडिया,समाचार चैनलों के प्रति एक बार फिर से वही श्रद्धा और चौथा खंभा होने
> का भ्रम पैदा हो गया होगा जैसा कि निर्मल बाबा के दौरान हुआ था..लेकिन इस
> श्रद्धा सीजन-2 में मौका मिले तो ये आइबीएन 7 और न्यूज 24 जैसे चैनलों से ये
> सवाल जरुर पूछिएगा कि जब तुम आसाराम की खबर से भी धारदार निर्मल बाबा के
> पर्दाफाश होने की खबर दिखा रहे थे तो अभी भी आधे घंटे का निर्मल समागम किस
> सरोकार के तहत चला रहे हो
>
> 2. आसाराम के कई पर्यायवाची बना दिए जाने के बीच जो भी धुंआधार कवरेज देख रहा
> हूं, मुझे उसकी पैटर्न साल 2005 में प्रिंस नाम के बच्चे के गड्ढे में गिरने
> की कवरेज लगातार याद आ रही है. फर्क सिर्फ इतना है कि वो बच्चा लोगों की करतूत
> और लापरवाही से गड्ढे में गिरा था जबकि यहां लाखों लोग इस आसाराम के करतूत के
> कारण गड्ढे में गिरते आए हैं. कवेरज की फार्मेट लगभग बराबर है और अगर टाइम्स
> नाउ और इंडिया टीवी की फार्मेट देखें तो आतंकवादी घटना की कवरेज से मेल खाती
> हुई..
>
> 3. आसाराम की हालत की चर्चा जिस तरह टीवी चैनल कर रहे हैं, आपको बार-बार लगेगा
> कि इससे तो लाख गुणा अच्छा अपना बच्चा प्रिंस था, चालीस घंटे से उपर गड्ढे में
> भूखे-प्यासे पड़ा रहा लेकिन थोड़े दिनों बाद टनमनाकर रियलिटी शो में हाजिर हो
> गया, बिस्कुट बेचने लग गया. इसका मतलब यही है कि ये सब सत्संग, संयम,
> आत्मज्ञान और अकेले में घंटों ध्यान लगाने की बात बंडलबाजी है. भक्तगणों, जब
> तुम्हारे आराध्य के 4-5 घंटे में ही इस आत्मज्ञान से बाजा बज गया, तब तुम्हारी
> क्या दशा होगी ? सो प्लीज लीव दस आत्मज्ञान एन ऑल दीज बुल्लशिट एंड
> सांसारिकता, प्रतिरोध,संघर्ष की दुनिया में लौटो.
>
> 4. इंडिया न्यूज की तत्परता आसाराम की गिरफ्तारी को लेकर इस कदर बनी हुई है कि
> सुबह के आठ ही बजे उसे सलाखों में दिखा दिया. जो वॉल उसने तैयार की, उसे देखते
> हुए किसी को भी लगेगा कि वो जोधपुर पहुंचने के पहले ही, बिना किसी कार्रवाई और
> सुनवाई के सीधे जेल चला गया..मीडिया ट्रायल मामले में तो ये आजतक का भी बाप
> निकला.
> **
> [image: Photo: इंडिया न्यूज की तत्परता आसाराम की गिरफ्तारी को लेकर इस कदर
> बनी हुई है कि सुबह के आठ ही बजे उसे सलाखों में दिखा दिया. जो वॉल उसने तैयार
> की, उसे देखते हुए किसी को भी लगेगा कि वो जोधपुर पहुंचने के पहले ही, बिना
> किसी कार्रवाई और सुनवाई के सीधे जेल चला गया..मीडिया ट्रायल मामले में तो ये
> आजतक का भी बाप
> निकला.:)]<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10201701556918378&set=a.10200486778069666.2195810.1163764868&type=1&relevant_count=1>
>
> 6. आपको लग रहा होगा कि न्यूज चैनल आसाराम की धुंआधार कवरेज से अंधविश्वास और
> पाखंड के खिलाफ लड़ रहे हैं, नहीं जी..वो उस रिवन्यू सिस्टम से हार रहे हैं
> जहां दो दिनों तक इस कवरेज के जरिए आसाराम जैसे शख्स को पाखंडी,धोखेबाज,उसकी
> हरकतों को ड्रामा और गुंडई बताने के कुछ ही दिनों बाद अपने यहां ऐसी जगह तैयार
> करेंगे हैं, जहां आधे-एक घंटे सिर्फ वो, उनके ड्रामे और प्रवचन होंगे. बीच में
> कोई लक्स कोजी से निकलनेवाले चूजे और 140 रुपये की गैस नहीं डियो उड़ानेवाले
> लौंड़े के पीछे आधे दर्जन लड़कियां होगी बल्कि शांतचित्र सिर्फ बाबा और उनके
> अमृतवचन होंगे. इसे विज्ञापन कहा जाएगा जी और आप तो जानते ही हैं टीवी में
> विज्ञापन का मतलब होता है महामृत्युंजय जाप जिसके बीच में किसी तरह की खलल
> नहीं डाली जाती, ऐसा विधान है. हैं जी, आप पूछते हैं तब चौथे खंभे का क्या
> होगा ? लो कल्ल लो बात. इसमे पूछना क्या है ? आइबीएन 7 की बुलेटिन ढोल-नगाड़े
> की ट्यून की तरह वैसे ही शुरु होगी जैसे कि मंडी हाउस से कोई भारी रैली निकल
> रही है और उस पर निर्मल दरबार लगेगा और पीछे से तीन-साढ़े तीन सौ लोगों की
> विदाई होगी..अजी, गांवघर में इसे कहते हैं- जात भी गंवाना और भात भी न
> खाना..सब साथे-साथ चलेगा जी..छंटनी भी और कमाई भी. पाखंड भी और पाखंड उन्मूलन
> कार्यक्रम भी..है न ओरोजिनल तमाशा..बीच-बीच में भूख लगने पर पेटिस( नॉट
> पेचिश)- बर्गर और कोक-शोक भी चलेंगे..तो डन न जी.
> [image: Photo: आपको लग रहा होगा कि न्यूज चैनल आसाराम की धुंआधार कवरेज से
> अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ लड़ रहे हैं, नहीं जी..वो उस रिवन्यू सिस्टम से
> हार रहे हैं जहां दो दिनों तक इस कवरेज के जरिए आसाराम जैसे शख्स को
> पाखंडी,धोखेबाज,उसकी हरकतों को ड्रामा और गुंडई बताने के कुछ ही दिनों बाद
> अपने यहां ऐसी जगह तैयार करेंगे हैं, जहां आधे-एक घंटे सिर्फ वो, उनके ड्रामे
> और प्रवचन होंगे. बीच में कोई लक्स कोजी से निकलनेवाले चूजे और 140 रुपये की
> गैस नहीं डियो उड़ानेवाले लौंड़े के पीछे आधे दर्जन लड़कियां होगी बल्कि
> शांतचित्र सिर्फ बाबा और उनके अमृतवचन होंगे. इसे विज्ञापन कहा जाएगा जी और आप
> तो जानते ही हैं टीवी में विज्ञापन का मतलब होता है महामृत्युंजय जाप जिसके
> बीच में किसी तरह की खलल नहीं डाली जाती, ऐसा विधान है. हैं जी, आप पूछते हैं
> तब चौथे खंभे का क्या होगा ? लो कल्ल लो बात. इसमे पूछना क्या है ? आइबीएन 7
> की बुलेटिन ढोल-नगाड़े की ट्यून की तरह वैसे ही शुरु होगी जैसे कि मंडी हाउस
> से कोई भारी रैली निकल रही है और उस पर निर्मल दरबार लगेगा और पीछे से
> तीन-साढ़े तीन सौ लोगों की विदाई होगी..अजी, गांवघर में इसे कहते हैं- जात भी
> गंवाना और भात भी न खाना..सब साथे-साथ चलेगा जी..छंटनी भी और कमाई भी. पाखंड
> भी और पाखंड उन्मूलन कार्यक्रम भी..है न ओरोजिनल तमाशा..बीच-बीच में भूख लगने
> पर पेटिस( नॉट पेचिश)- बर्गर और कोक-शोक भी चलेंगे..तो डन न
> जी.]<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10201701674841326&set=a.10200486778069666.2195810.1163764868&type=1&relevant_count=1>
>
> 7. आसाराम ने जेल के लिए बैकुंठ शब्द का प्रयोग किया. उसके बाद से इंडिया
> न्यूज ने जेल के लिए जेल शब्द का प्रयोग करना छोड़ सीधे बैकुंठ लिखना शुरु
> किया. सड़ी-गली स्थिति में मौजूद जेल के लिए बैकुंठ शब्द इस्तेमाल कर आसाराम
> ने जो इज्जत बख्शी है, उनके भक्तगण इससे भले ही अभिभूत हों लेकिन चैनल के अंदर
> का पाखंड़ लाख कोशिशों के बावजूद भी उजागर हो जा रहा है. चैनलों का ऐसे पाखंड
> और अंधविश्वास दिखाए जाने के पीछे का तर्क होता है कि लोग देखना चाहते हैं
> जबकि सच्चाई है कि चैनल और मीडिया का मानसिक गठन भी इसी अंधविश्वास और पाखंड
> के बीच पनपता आया है. नहीं तो जेल के लिए बैकुंठ शब्द इस्तेमाल करने के पीछे
> उसे इस बात पर गौर नहीं करना चाहिए कि इसका क्या अर्थ हैं ? मुझे तो आशंका हो
> रही है कि कहीं आसाराम के भक्तगण आसामराम के लिए बैकुंठ जाने का कुछ और ही
> अर्थ न लगा लें. अब ये तर्क मत देने लग जाइएगा कि चैनल ने ऐसा आसाराम पर
> व्यंग्य के लिए लिखा है..मीडिया और चैनल व्यंग्य को लेकर कितने सीरियल हैं, वो
> हमें भी लॉफ्टर शो की घंटों फुटेज काटकर दिखाए जाने के बीच समझ आता है.
> [image: Photo: आसाराम ने जेल के लिए बैकुंठ शब्द का प्रयोग किया. उसके बाद से
> इंडिया न्यूज ने जेल के लिए जेल शब्द का प्रयोग करना छोड़ सीधे बैकुंठ लिखना
> शुरु किया. सड़ी-गली स्थिति में मौजूद जेल के लिए बैकुंठ शब्द इस्तेमाल कर
> आसाराम ने जो इज्जत बख्शी है, उनके भक्तगण इससे भले ही अभिभूत हों लेकिन चैनल
> के अंदर का पाखंड़ लाख कोशिशों के बावजूद भी उजागर हो जा रहा है. चैनलों का
> ऐसे पाखंड और अंधविश्वास दिखाए जाने के पीछे का तर्क होता है कि लोग देखना
> चाहते हैं जबकि सच्चाई है कि चैनल और मीडिया का मानसिक गठन भी इसी अंधविश्वास
> और पाखंड के बीच पनपता आया है. नहीं तो जेल के लिए बैकुंठ शब्द इस्तेमाल करने
> के पीछे उसे इस बात पर गौर नहीं करना चाहिए कि इसका क्या अर्थ हैं ? मुझे तो
> आशंका हो रही है कि कहीं आसाराम के भक्तगण आसामराम के लिए बैकुंठ जाने का कुछ
> और ही अर्थ न लगा लें. अब ये तर्क मत देने लग जाइएगा कि चैनल ने ऐसा आसाराम पर
> व्यंग्य के लिए लिखा है..मीडिया और चैनल व्यंग्य को लेकर कितने सीरियल हैं, वो
> हमें भी लॉफ्टर शो की घंटों फुटेज काटकर दिखाए जाने के बीच समझ आता
> है.]<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10201701757883402&set=a.10200486778069666.2195810.1163764868&type=1&relevant_count=1>
>
> 8. जब 1984 में दिल्ली के अलग-अलग इलाके में सिक्ख विरोधी दंगे हो रहे थे, उस
> वक्त दूरदर्शन बॉबी फिल्म दिखा रहा था..अब बदल दीजिए ये प्रयोग और कहिए कि जब
> आजतक और न्यूज 24 के साथी दर्जनों चैनल,देश में आत्मविश्वास और जागरुकता
> फैलाने का काम कर रहे थे तो ये दोनों क्रमशः आपके तारे और कालचक्र दिखा रहे
> थे.
> **
> [image: Photo]
> <https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10201701715362339&set=pcb.10201701823765049&type=1&relevant_count=2>
> <https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10201701822845026&set=pcb.10201701823765049&type=1&relevant_count=1>
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> 9. प्रभु, जहां तक हमें पता है लोग बैकुंठ शान से जाते हैं, अपने प्रवचन और
> लीलागान में भी आपने ऐसा ही बताया है. इस तरह बार डांसर के बिचौलिए, कोकीन-चरस
> की तस्करी करनेवाले दल्ले की तरह चेहरा ढंककर नहीं, फिर आपने तो मुक्ति का काम
> किया, प्रसाद बांटने का काम करते आए हैं तो बैकुंठ जाते वक्त ऐसा क्यों किया ?
> क्या किसी ने आसाराम से इस तरह के सवाल पूछते हुए देखा या सुना है, बीच में
> मैं वाशरुम चला गया था तो हो सकता है इस बीच मिस्स हो गया हो.
>


-- 
Thanks & Best Regards,

Rakesh Kumar Singh

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''सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना''

                                                           - पाश


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