[दीवान]टीवी पर तो बन गई नरेन्द्र मोदी की सरकार

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Sun Sep 29 02:37:04 CDT 2013


1. सीएनएन-आइबीएन की बेशर्मी अपने चरम पर है. नरेन्द्र मोदी को बुलाए जाने के
पहले शंख फूंके जा रहे हैं और चैनल ने उसे स्टिल तस्वीर की शक्ल में तब तक
पड़ा रहा जब तक की ये फूकाई बंद नहीं हो गई.

2. 2009 के लोकसभा चुनाव में पेड न्यूज के दाग दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे
राष्ट्रीय संस्करण के अखबार पर लगे थे. न्यूज चैनल लगभग इससे बरी थे और
सीएनएन-आइबीएन के राजदीप सरदेसाई हीरो बनकर उभरे थे, पेड न्यूज के खिलाफ झंड़ा
लेकर भाषणबाजी करते नजर आते थे. टीवी चैनलों ने कुछ हेर-फेर किया था, ऐसा कहना
इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि इसकी मॉनिटरिंग उतने कायदे से नहीं हो पाती.
लेकिन 2014 के चुनावी कवरेज पर गौर करें तो न्यूज चैनलों के लिए पेड न्यूज,
पेड कवरेज का हिस्सा बनकर एक पैटर्न सा हो गया है.

3. सीएनबीसी आवाज पर किसी भी तरह की बिजनेस खबर देने के बजाय मोदी कवरेज में
जुटा है. नेटवर्क 18 में जब मीडियाकर्मी की छंटनी हुई तो इसके पीछे जो
अंदरखाने से खबर आयी, उसमे तर्क ये था कि एक ही मीडिया हाउस के इतने क्र्यू
क्यों जाए..लेकिन नेटवर्क 18 से रिलायंस 18 बने इस चैनल में मोदी के नाम पर सब
हवा.

4. देशभर में मीडिया की पढ़ाई कर रहे मेरे दोस्तों. आप अगर अपने चौथे खंभे के
चरित्र को समझना चाहते हैं तो कुछ मत कीजिए. अपने पास पानी की बोतलें, खाने की
चीजें रख लीजिए और कम से कम लगातार छह घंटे टीवी देखिए, आप जो समझ बनाएंगे, वो
समझ हम जैसे सिलेबस कंटेंट सप्लायर पूरे सेमेस्टर में नहीं दे पाएंगे.
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