[दीवान]हैगा-हैगा, हम कॉलेज जांगी, जांगी

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Sep 23 13:51:47 CDT 2013


वो लड़की कॉलेज गेट से बाहर निकल रही थी कि सामने से गेट की तरफ बढ़ते लड़के
ने कहा- शक्ल देखी है कभी जो कॉलेज की गेट में घुसी पड़ी है. कभी मुंह भी
देखने सकेगी कॉलेज की ? कभी कॉलेज तक नहीं जा सकेगी तू.

लड़की ने पहले तो बहुत ही सहज भाव से कहा- हैगी. जागी, कॉलेज जागी..दस सेकंड
भी नहीं हुए होंगे कि लगातार बोलने लगी- हम जरुर कॉलेज जांगी,
जरुर,जरुर,जरुर..उसके इस तरह लगातार बोले जाने में एक ही एक जबरदस्त आकर्षण
राइम्स बन जा रही थी और सामनेवाले लड़के प्रति हिकारत का भाव भी. आखिर में कह
ही दिया..कमीना स्साला, तेको क्या लगता है सिरिफ तुई कॉलेज जाएगा और
गुंडागर्दी करेगा, हम भी जांगी.

मैंने लड़के से पूछा- किस क्लास में पढ़ते हो ? उसका उल्टा सवाल था- तेरे को
मतलब, तेरे से उंची क्लास में पढ़ता हूं..फिर पूछा- क्यों पूछा मेरी क्लास ?
मैंने कहा- ऐसे ही, अगर बीए में पढ़ रहा होता तो कान के नीचे देता कायदे से और
फिर मीडिया के एकाध चैप्टर पढ़ाता. ऐसे ही बात करते हैं अपनी क्लासमेट से ?

तेरे को क्या मतलब, इस पागल से ऐसे ही बात करते हैं.

लड़की ने आकर जोर से कहा- सर, ये ऐसे ही..बिगड़ा हुआ शुरु से ही. मुंह मत लगो
इससे.

( कॉलेज से घुसते-निकलते अक्सर स्कूल की छुट्टी का वक्त होता है तो देखता हूं
बहुत सारे स्कूली बच्चे कॉलेज के अंदर पानी पीने या ऐसे ही आसपास घूमने आ जाते
हैं. ये दोनों बच्चे उन्हीं में से थे जिनकी उम्र सात-आठ साल से छह महीने भी
ज्यादा नहीं होगी)
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