[दीवान]यूट्यूब पर लिंक डाल दो न फिरः लप्रेक

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Sat Sep 7 13:23:32 CDT 2013


नहीं पिउ, आज रहने देते हैं.घर में ही कुछ बना लेते हैं न. वैसे भी मैं बहुत
थका हूं..

नेक्सट वीकएंड..नेक्सट वीकएंड,नेक्सट वीकएंड..ध्यान ! तुम पिछले तीन बार से
ऐसा कह रहे हो, वन टू 2 थाउजेंड वक्स इज नॉट ए बिग डील यार, कमऑन..चलो न आज
चायना रिपब्लिक में चलकर कुछ नया ट्राय करते हैं..मेरा बड़ा मन हो रहा है.

पिउ, इफ यू डोन्ट माइंड, तुम जब मेरे गले में अपनी बाहें डालकर ऐसी जिद करती
हो न तो लगता है कोई फांसी का फंदा डालकर नाइन्टीज के गाने जोर-जोर से बजा दे
रहा हो. प्लीज..इस बार रहने दो न.चलो मैं ही चीला बना देता हूं और साथ में
मूंगफली की चटनी.तुम्हें पसंद भी तो है न.

ध्यान को लगा कि पिछले तीन बार की तरह इस बार भी पिउ मेरी पसंद और च्वाइस पर
जीडी करनी शुरु करेगी और आखिर में ये कहकर कि तुम्हारी पसंद बिल्कुल सड़ी सी
है,किचन की तरफ बढ़ जाएगी कि चलो ठीक है लेकिन नेक्सट वीक पक्का..लेकिन नहीं,
इस बार पिउ की आंखों से आंसू के मोटे-मोट धार छूट गए थे..
मन तो किया अचानक उठकर पिउ को जोर से हग करे और छर्रेवाली बंदूक से भी न
फूटने/पिचकनेवाली गुब्बारों जैसी गालों पर ताबड़तोड़ इतनी किशेज जड़ दे कि ये
आंसू की धार भाप बनकर उड़ जाए..लेकिन नहीं, वो पिउ को एकटक देखता रहा. थोड़ी
देर बाद पिउ भी ध्यान को..
..................................X.........................
......X....................................X.

कैमरा ले आओ न, वीडियो बनाकर यूट्यूब पर डाल देना ताकि दुनिया उस पर क्लिक
करके देख सके कि ओह तो ये है प्याली शाश्वत का सच, स्क्रीन पर- स्त्री को
रुलाया जा सकता है,रोका नहीं जा सकता..औरत अपने अधिकार छीनकर लेने में थोड़ी
देर लगा सकती है लेकिन छोड़ नहीं सकती..संसद का ये हंगामा कल सड़कों की आवाज
बनकर फैलेगा.. कैमरामैन आसिफ के साथ मैं प्याली शाश्वत इंडिया मोशन के लिए.
यार, मैंने घर के लोगों के लाख मना करने, अपनी कूलीग की लाख ताने के बावजूद
तेरे साथ रिलेशनशिप में आयी कि तू अपने प्रोफेशन का है, समझ सकेगा कि मेरे आधी
रात घर लौटने की क्या मजबूरी हो सकती है, सेंसेटिव है तो समझ सकेगा कि
दुनियाभर की खबरों का मेरे मन पर क्या असर होता है..पैकेज,रोल इन,इनजस्टिंग की
बमबारी के बीच बचा सकेगा मेरी छोटी-छोटी खुशियों को लेकिन....

पहले हमारे पास इतने पैसे नहीं होते थे कि सौ रुपये की चाचे दी हट्टी में भी
खा सकें..आज इतने पैसे हैं कि कहीं भी खा सकते हैं लेकिन तेरा कभी मूड नहीं
होता..हद है यार..तू इंसान की फीलिंग्स नहीं समझ पाता अब..
प्याली रौ में बोले जा रही थी..लगा बीच में टोक दूं और सीधे कहूं- अच्छा चल
अब..लेकिन आज दोपहर का अंकुर का चेहरा याद आ गया..यार ध्यान, अब सोचता हूं कि
कैसे अपन सिर्फ सूट्टे पर रोज सौ-दो सौ फूंक देते थे लेकिन कल जब निधि ने दूध
का क्लास ये कहते हुए फेंक दिया कि इसमे कॉम्प्लान नहीं है तो मैंने बिना सोचे
उसे एक थप्पड़ जड़ दिया..वो रोते हुए कहने लगी- पापा आप गंदे हो, बहुत गंदे.
मैं आपसे कट्टिस,कभी बात नहीं करुंगी..नाना को फोन करके बताउंगी, पापा अब मुझे
मारते हैं..ध्यान तब से मैं अपनी सिगरेट की पी गई डिब्बी से कॉम्प्लान के
डब्बे का गुना-भाग करने में लगा हूं और सोच रहा हूं कि हमने निधि के कितने
डब्बे कॉम्प्लान के धुएं में उड़ा दिए..16 अगस्त के बाद से जिंदगी इतनी
छोटी-छोटी चीजों को लेकर भारी कर देगी, कभी कल्पना ही नहीं किया..
ओह अंकुर, तू स्साले कौन सा रोग देकर चला गया..हम तेरी कॉम्प्लान से पिस्ता की
प्लेट मल्टीप्लाय करने लग रहे हैं यार..इट्स हॉरीबल( लप्रेकः टुकड़ों-टुकड़ों
में मीडिया छंटनी के बाद)
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