[दीवान]देखन में छोटन लगै: कल शाम 7 बजे हैबिटैट पहुँचें

Ravikant ravikant at sarai.net
Mon Mar 18 07:21:04 CDT 2013


दोस्तो,

लघु पत्रिकाओं पर छिटका-छाँव बातचीत होती रही है। पिछले दसेक सालों में कम से
कम हिन्दी में तो बाक़ी बाज़ार की तरह लघु पत्रिकाओं के इलाक़े में भी तेज़
वृद्धि दर देखी जा सकती है। ऊँची मृत्यु-दर के इस देश में आजकल यहाँ भी सुधार
है। जब से भारतीय भाषा कार्यक्रम, सीएसडीएस के नवीन ने लघु पत्रिकाओं को
इकट्ठा करके उन पर शोध करना शुरू किया है, हमें लगने लगा कि इन पर व्यापकतर
बातचीत भी ज़रूरी है। नवीन का शोध हम लोगों की इस चिंता से भी ऊपजी थी लघु
पत्रिकाओं का ये ‌वृहत संसार इतना अदृश्य क्यों है!

तो आइए, कल इस बातचीत की शुरुआत 'अकार' के बहाने इसके कर्ता-धर्ता,
कहानीकार-इतिहासकार प्रियंवद से करते हैं। जब हमने प्रियंवद जी से अपनी मंशा
साझा की तो उन्होंने कहा कि मैं अकार पर न बोलकर हिन्दी पत्रिकाओं के कुछ
ऐतिहासिक प्रसंगों पर बोलूँगा। तो उन्होंने एक पर्चानुमा तैयार किया है, जिसे
वे पेश करेंगे, पर बाक़ी बातचीत मेरे अलावा आप सबके साथ होगी।

तो ज़रूर आइए, 19 तारीख़, शाम सात बजे, कैज़ुरीना, इंडिया हैबिटैट सेंटर.
दिल्ली.
-------------- next part --------------
An HTML attachment was scrubbed...
URL: <http://mail.sarai.net/pipermail/deewan_mail.sarai.net/attachments/20130318/63f62ce4/attachment.html>


More information about the Deewan mailing list